प्रतिदिन कुछ बगुले आकर एक किसान के खेत
की फसल बर्बाद कर जाया करते थे । इसे देखकर किसान ने उन बगुलों पकड़ने के लिए खेत
में जाल बिछाकर रख दिया । बाद में उसने जाकर देखा तो बहुत से बगुले उस जाल में फंसे
हुए थे और उनके साथ एक सारस भी फंसा हुआ था । सारस ने किसान से खुद को आजाद करने
की विनती की तथा कहा कि किसान भाई मैं बगुला नहीं हूँ तथा मैंने कभी भी तुम्हारी
फसल को बर्बाद नहीं किया कृपा करके मुझे छोड़ दो, तुम विचार करके देखो की हमारी
पक्षी प्रजाति में तुम्हे मुझ जैसा धर्मपरायण कोई दूसरा पक्षी नहीं मिलेगा, मैंने
कभी किसी को कोई नुकसान नहीं पंहुचाया है । इस पर किसान ने कहा सुनो सारस तुमने जो
कुछ भी कहा वो सच होगा मुझे इसमें कोई संदेह नहीं किन्तु तुम मेरी फसल बर्बाद करने
वाले इन बगुलों के साथ पकड़े गए हो, अतः तुम्हे भी इनके साथ सजा भोगनी ही होगी........
क्योंकि कुसंग का फल सदैव बुरा होता है ।
अमृतभाष्य हिंदी भाषी पाठकों के लिए ऑनलाइन पत्रिका है। जैसाकि पत्रिका के नाम से विदित है, हम इस नाम की गरिमा को ध्यान में रखते हुए सभी विषयों पर दैनिक आलेख उपलब्ध कराएँगे।संभवतः पत्रिका ज्ञान-विज्ञान,सनातन साहित्य , धर्म आलेख ,खेल विशेष ,नवीन परिधान,गृह सज्जा,बागवानी,पाक कला ,कथा साहित्य और अन्य कई विषयों पर उद्देश्यपरक पठनीय सामग्री देने हेतु कार्य करेगी।विश्वव्यापी संजाल में हिंदी भाषा के सुधि पाठकों को कुछ पठनीय व ज्ञानवर्धक,सरल साहित्य उपलब्ध हो सके ऐसा हमारा प्रयास है।
कथा-संसार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कथा-संसार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 21 जनवरी 2017
मंगलवार, 10 जनवरी 2017
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
अपनी संतान से कैसा व्यवहार करना उचित है ? ; How is it appropriate to treat your child ?
एक अत्यंत पुरानी एवं सच्ची कहावत है कि जो जैसा बीज बोता है, वह वैसा ही फ...







